सीहोर (गौतम शाह ) नगर का केदारवेश्वर धाम बना आस्था का केन्द्र , लगातार बढ़ रही भक्तो की संख्या , मनोकामना पूरी होने पर भक्त आ रहे जल चढ़ाने
सीहोर का श्री केदारेश्वर धाम बना अटूट आस्था का केंद्र, रोज उमड़ रहा श्रद्धालुओं का सैलाब
सीहोर। श्रावण मास में भगवान शिव की भक्ति का रंग सीहोर की पावन धरती पर देखते ही बन रहा है। 1000 किलोमीटर दूर हरिद्वार से साइकिल की यात्रा कर श्रद्धालु मां गंगा का जला के केदारनाथ भगवान केदारनाथ की पावन शिला पर गंगाजल अर्पित कर रहे हैं श्री माधव महाकाल आरोग्य आश्रम एवं श्री राम गौशाला क्षेत्र में विराजमान श्रीकेदारनाथ शिला श्रद्धालुओं के लिए अटूट आस्था और श्रद्धा का केंद्र बन गई है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दूर-दूर से पहुंचकर कावड़ में पवित्र जल लेकर बाबा केदारनाथ को अर्पित कर रहे हैं।
श्री केदारेश्वर धाम में इन दिनों सुबह से ही हर-हर महादेव और ॐ नमः शिवाय के जयघोष गूंज रहे हैं। श्रद्धालुओं की आस्था का यह दृश्य अपने आप में अद्भुत है। छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर आयु वर्ग के श्रद्धालु कावड़ लेकर बाबा के दरबार में पहुंच रहे हैं। दो वर्ष के नन्हे बालक से लेकर 82 वर्ष की आयु के बुजुर्ग तक श्रद्धालु पूरी श्रद्धा के साथ केदारनाथ शिला पर कावड़ का जल अर्पित कर रहे हैं।
कावड़ में जल नहीं, आस्था लेकर पहुंच रहे श्रद्धालु
श्रद्धालुओं के लिए कावड़ केवल जल ले जाने का माध्यम नहीं, बल्कि भगवान शिव के प्रति समर्पण, संकल्प और श्रद्धा का प्रतीक बन गई है। भक्त पवित्र जल को कावड़ में धारण कर पैदल यात्रा करते हुए श्री केदारेश्वर धाम पहुंचते हैं और विधि-विधान एवं श्रद्धाभाव से बाबा केदारनाथ को जल अर्पित करते हैं।
मान्यता है कि भगवान शिव को जल अर्पित करने से मनुष्य के भीतर श्रद्धा, संयम और सकारात्मक भाव जागृत होते हैं। श्रावण मास में शिवलिंग पर जलाभिषेक का विशेष महत्व माना गया है। इसी आस्था के चलते श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं और संकल्पों के साथ बाबा के दरबार में पहुंच रहे हैं।
केदारनाथ शिला में श्रद्धालुओं को मिल रही बाबा केदार की अनुभूति
द्वादश ज्योतिर्लिंगों में भगवान केदारनाथ का विशेष स्थान है। हिमालय में विराजमान श्री केदारनाथ महादेव करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र हैं। सीहोर में स्थापित श्री केदारनाथ शिला को श्रद्धालु उसी भक्ति और श्रद्धा से नमन करते हुए जलाभिषेक कर रहे हैं। भक्तों का मानना है कि बाबा केदारनाथ की भक्ति और स्मरण जीवन में आध्यात्मिक ऊर्जा, साहस और विश्वास प्रदान करता है। सनातन परंपरा में जल को जीवन, पवित्रता और शीतलता का प्रतीक माना गया है। भगवान शिव पर जल अर्पित करना भक्त के मन के अहंकार, अशांति और नकारात्मक भावों को त्यागकर ईश्वर के चरणों में स्वयं को समर्पित करने का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि श्रावण मास में शिवालयों में जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।
श्री केदारेश्वर धाम में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं का पहुंचना इस बात का प्रमाण है कि आस्था की कोई उम्र नहीं होती और भगवान शिव की भक्ति हर वर्ग और हर पीढ़ी को अपने साथ जोड़ती है।
कावड़ यात्रियों के जयघोष, मंदिर परिसर में गूंजते हर-हर महादेव के स्वर और बाबा केदारनाथ पर अर्पित होता पवित्र जल इन दिनों सीहोर की धार्मिक आस्था को एक नई पहचान दे रहा है। श्रद्धालुओं की यह भक्ति और सेवा भाव आने वाले दिनों में भी निरंतर जारी रहने की उम्मीद है।
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