सीहोर - पालकी पर सवार होकर माता रानी का होगा आगमन , अनिष्ट की आशंका - प.गणेश शर्मा
चैत्र नवरात्री पर पालकी सवार होकर आ रही हैं माता दुर्गा, पंडित गणेश शर्मा l
चैत्र माह की नवरात्रि का प्रारंभ 19 मार्च 2026 गुरुवार से हो रहा है। ज्योतिष पद्म भूषण स्वर्ण पदक प्राप्त ज्योतिषाचार्य डॉ पंडित गणेश शर्मा ने बताया कि इस दिन घट स्थापना मुहूर्त सुबह 06:52 से 07:43 तक और दूसरा मुहूर्त दोपहर 12:05 से 12:53 के बीच रहेगा। 27 मार्च शुक्रवार नवमी के दिन नवरात्रि का समापन होगा। इस बार माता दुर्गा पालकी पर सवार होकर आ रही है। जानिए नवरात्रि की तिथियां और महत्व। इस दौरान वसंत ऋतु होने के कारण इसे वासंती नवरात्र भी कहा जाता है।
*प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ-* 19 मार्च 2026 को सुबह 06:52 बजे से।
*प्रतिपदा तिथि समाप्त-* 20 मार्च 2026 को सुबह 04:52 बजे तक।
*चैत्र अष्टमी:-* 26 मार्च 2026 गुरुवार के दिन अष्टमी।
*चैत्र नवमी:-* 27 मार्च 2026 शुक्रवार के दिन नवमी
*पालकी सवारी का फल:-*
पंडित शर्मा के अनुसार चैत्र नवरात्रि में माता की सवारी बहुत महत्व रखती है क्योंकि इससे आने समय का शुभ-अशुभ संकेत मिलते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माँ दुर्गा इन नौ दिनों के लिए जब पृथ्वी पर आती हैं, तो एक विशेष वाहन पर सवार होकर आती हैं। प्रत्येक वाहन का अलग फल संकेत माना गया है। देवी पुराण के अनुसार, पालकी (डोली) पर माता का आगमन शुभ नहीं माना जाता है। ये संकेत है कि देश में आर्थिक मंदी आ सकती है। प्रकृति अपने रौद्र रूप में जान-माल का नुकसान कर सकती हैं। मां दुर्गा का इस तरह आना देश-दुनिया में महामारी के बढ़ने के संकेत भी देता है। यह अस्थिरता और चुनौतियों का संकेत है।
चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होती है. इसी दिन से हिंदुओं का नववर्ष भी शुरू हो जाता है. चैत्र नवरात्रि के नौ दिन बड़े पावन और विशेष माने जाते हैं. नवरात्रि के दिनों में माता दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है. भक्त नौ दिनों का व्रत भी रखते हैं. नवरात्रि के दिनों में रात्रि जागरण होता है. मान्यता है कि नवरात्रि में पूजन और व्रत करने से माता दुर्गा बहुत प्रसन्न होती हैं.
नवरात्रि माता दुर्गा की कृपा पाने का सबसे शुभ अवसर माना जाता है. नवरात्रि में किए गए व्रत और पूजन के प्रभाव से जीवन के सारे कष्ट मिट जाते हैं. माता दुर्गा हर संकट को दूर करती हैं. ये व्रत जितना विशेष और प्रभावशाली है, उतने ही इसके व्रत नियम भी कठिन हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि नवरात्रि के दिनों में किन नियमों का पालन विशेष रूप से करना चाहिए
*घट स्थापना के समय रखें इन बातों का ध्यान*
पंडित शर्मा ने बताया कि कलश स्थापना से पहले पूजन स्थल की साफ-सफाई करें. कलश को अंदर से साफ कर लें. पूजा के लिए खंडित कलश का इस्तेमाल बिल्कुल न करें. कलश स्थापना हो जाए तो उसके पूरे नवरात्र माता की चौकी के पास से न हिलाएं. कलश को अपवित्र हाथों से भी नहीं छूएं. घर में घट स्थापना के बाद पूरे नवरात्र उस स्थान को खाली न छोड़ें. कलश स्थापना से पहले तामसिक चीजें घर से बाहर कर दें.
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